बिहार में नियोजित शिक्षकों की मांग: राज्यकर्मी का दर्जा क्यों सही और महत्वपूर्ण

बिहार में नियोजित शिक्षकों की मांग: राज्यकर्मी का दर्जा क्यों सही और महत्वपूर्ण

19 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास पर हुई सभी दलों के प्रतिनिधियों की बैठक में इस पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वह सभी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी।

बिहार सरकार राज्य के करीब चार लाख नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने के रास्ते में आ रही बाधाओं को दूर करेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में महागठबंधन दल के नेताओं के साथ बैठक की है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सकारात्मक तरीके से इस बारे में सभी दलों के प्रतिनिधियों से बात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सभी पहलुओं को देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समस्या के बारे में अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। मामला कई विभागों से संबंधित है। राज्य कैबिनेट से स्वीकृति लेनी होगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और वित्त मंत्री विजय चौधरी विशेष रूप से मौजूद थे।

बैठक में सबसे अहम रहा राज्यकर्मी के दर्जे का मुद्दा
मुख्यमंत्री के साथ महागठबंधन के दलों के प्रतिनिधियों की बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने का था।

इस बाबत हाल में आई सरकार की नियमावली में यह प्रविधान है कि नियोजित शिक्षकों को यह दर्जा हासिल करने के लिए बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित परीक्षा पास करनी होगी।

नियोजित शिक्षकों को इस बात पर एतराज है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह चाहते हैं शिक्षण की गुणवत्ता बढ़े। यह प्रस्ताव दिया गया कि किसी अन्य माध्यम से शिक्षक राज्यकर्मी का दर्जा के लिए परीक्षा में बैठ जाएं।

सरकार इस पर सकारात्मक तरीके से विचार करेगी। दूसरा मुद्दा अंतर जिला स्थानांतरण का था। इस पर भी सरकार के स्तर पर सैद्धांतिक सहमति बनी है।

कई विभागों से जुड़ा है मामला, कैबिनेट की मंजूरी जरूरी
नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने में पेंच यह है कि वे अलग-अलग नियोजन इकाइयों के माध्यम से नियोजित हुए हैं।

नियमत: जिन इकाइयों से वे आए हैं वही उनके बारे में निर्णय लेने के लिए वैधानिक रूप से जिम्मेदार है। उन्हें राज्यकर्मी का देने को लेकर विधिक परामर्श के साथ राज्य मंत्रिमंडल की अनुमति जरूरी है।

अपने संसाधन से शिक्षकों का वेतन बढ़ा रहे
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को वेतन की राशि राज्य सरकार ही दे रही है। वर्तमान में चालीस हजार रुपये तक मिल रहे हैं। सरकार समय-समय पर इसे बढ़ाती भी रही है।

केंद्र सरकार से इस बाबत राशि कम मिल रही है, फिर राज्य सरकार इस दिशा में सकारात्मक है। टीईटी उर्दू के परिणाम पर भी सहमति रही है।

नियोजित शिक्षक कहना अपमानजनक
मुख्यमंत्री की बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि नियोजित शिक्षक कहना अपमानजनक लगता है। इनके लिए इस शब्द को हटा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह तो खुद भी इसी तरह की बात कहते रहे हैं।

बिहार सरकार ने इस फैसले की ओर क्यों कदम बढ़ाया है और शिक्षकों की मांग क्यों सही है।

1. नियोजित शिक्षकों का दर्जा और उनकी मांग
बिहार में विभिन्न पदों पर नियोजित शिक्षक काम कर रहे हैं, जो विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान कर रहे हैं। ये शिक्षक अपने काम में परिपूर्णता प्राप्त करने के बाद भी उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मिलता है, जिससे उन्हें कई अधिकार और लाभ नहीं मिल पाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, ये शिक्षक अपने उच्च स्तर के काम के बावजूद भी नीचे दिखाई देते हैं। उनकी मांग है कि उन्हें राज्यकर्मी के दर्जे का प्रदान किया जाए ताकि उन्हें उनके काम के परिणामस्वरूप योग्यता और सेवानिवृत्ति के अधिकार हासिल हो सकें।

2. शिक्षा के माध्यम से समृद्धि की दिशा में
शिक्षकों का महत्व समझते हुए, नियोजित शिक्षकों को उनके काम की मान्यता और सम्मान के साथ-साथ उच्च जीवन मानकों की तरफ बढ़ाने की आवश्यकता है। यह निश्चित रूप से शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक पहला कदम हो सकता है, क्योंकि यदि शिक्षक खुश और संतुष्ट होंगे, तो वे अधिक उत्तरदायी तरीके से शिक्षा प्रदान कर पाएंगे।

3. अधिकार और लाभों का प्रदान
राज्यकर्मी का दर्जा पाने से नियोजित शिक्षक अनेक अधिकार और लाभों का उपयोग कर सकते हैं। इससे उन्हें नौकरी की सुरक्षा मिलेगी और उन्हें सरकारी नौकरी के लिए विभिन्न अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही, उन्हें पेंशन और स्वास्थ्य लाभ का भी उपयोग हो सकेगा।

4. शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति की दिशा में
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। राज्यकर्मी के दर्जे से शिक्षकों के पास अधिक संसाधन होंगे, जिनका उपयोग उन्हें अपने शिक्षा कार्यों को और भी उन्नत बनाने में किया जा सकता है।

5. अधिक उत्तरदायित्व और प्रेरणा
राज्यकर्मी का दर्जा पाने से नियोजित शिक्षकों का उत्तरदायित्व भी बढ़ेगा। इससे उन्हें अपने काम को और सजगता से निष्पादित करने का अधिक उत्तरदायित्व मिलेगा, जिससे उनमें और भी उत्साह और प्रेरणा बढ़ेगी।

6. सरकार की इस पहल का महत्व
बिहार सरकार की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा की ओर पहला कदम हो सकती है। यह शिक्षकों को सम्मानित महसूस कराएगी और उनके मानवाधिकारों का पालन करेगी।

7. निष्कर्ष
इसके आधार पर, बिहार सरकार की यह पहल नियोजित शिक्षकों के लिए एक बड़ी सुविधा हो सकती है, जिससे उन्हें उच्च स्तर के उत्तरदायित्व और अधिक लाभ प्राप्त हो सकेगा। इससे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार हो सकता है और नए दिशानिर्देश तय हो सकते हैं जो शिक्षा के स्तर को उच्च करने में मदद कर सकते हैं।

संक्षेप में
बिहार सरकार की नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान करने की पहल ने शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। यह शिक्षकों को उच्च स्तर के उत्तरदायित्व और लाभ प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे उन्हें उनके काम को और भी सजगता से निष्पादित करने का मौका मिलेगा।

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